AI Cyber Attack India 2026: भारत में साइबर सुरक्षा को लेकर एक गंभीर चेतावनी सामने आई है। देश की प्रमुख साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In (Indian Computer Emergency Response Team) ने बैंकों, नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs), फिनटेक कंपनियों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित साइबर हमलों को लेकर अलर्ट किया है।

एजेंसी के अनुसार, साइबर अपराधी अब AI आधारित टूल्स और ऑटोमेटेड सिस्टम का इस्तेमाल करके वित्तीय संस्थानों के डिजिटल सिस्टम को निशाना बना रहे हैं। इन हमलों के जरिए बिना अनुमति के बैंकिंग ट्रांजैक्शन और फंड ट्रांसफर किए जा सकते हैं।

CERT-In ने 4 नवंबर 2026 को जारी अपनी गंभीर चेतावनी में ‘CRAFTY FALCON’ नाम से पहचाने गए साइबर खतरे का उल्लेख किया है। एजेंसी ने कहा है कि यह अभियान अभी भी सक्रिय है और वित्तीय संस्थानों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है।

क्या है AI आधारित साइबर हमले का पूरा मामला?

CERT-In की ताजा एडवाइजरी के अनुसार, साइबर अपराधी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से वित्तीय संस्थानों के सिस्टम में मौजूद कमजोरियों का पता लगा रहे हैं।

पहले साइबर हमलों में काफी समय लगता था, लेकिन अब AI आधारित तकनीक की मदद से हमलावर कम समय में कई स्तरों पर साइबर हमले कर सकते हैं।

इन हमलों का मुख्य निशाना बैंकिंग और वित्तीय संस्थानों के पेमेंट सिस्टम, डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म, पेमेंट एग्रीगेटर्स और फंड डिस्बर्समेंट सिस्टम हैं।

हमलावर संस्थानों के पेमेंट API और डिजिटल सिस्टम का गलत इस्तेमाल करके बिना अनुमति के पैसे ट्रांसफर करने की कोशिश कर रहे हैं।

CRAFTY FALCON क्या है?

CERT-In ने अपने 4 नवंबर के अलर्ट में इस साइबर हमले के पीछे सक्रिय खतरे को ‘CRAFTY FALCON’ नाम दिया है।

एजेंसी के अनुसार, यह AI की सहायता से काम करने वाला एक वित्तीय साइबर खतरा है, जो मशीन की गति से अलग-अलग सिस्टम की कमजोरियों का पता लगाने और उनका फायदा उठाने में सक्षम है।

इस अभियान में कई AI आधारित साइबर सिक्योरिटी टूल्स के दुरुपयोग की जानकारी सामने आई है।

इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • ARTEX: AI आधारित टूल्स का एक समूह।

  • PentAGI: ऑटोनॉमस मल्टी-एजेंट AI सिस्टम।

  • Cairn: साइबर अटैक सर्च इंजन।

  • CyberStrikeAI: AI आधारित साइबर अटैक फ्रेमवर्क।

इन टूल्स की मदद से हमलावर तेजी से अलग-अलग हमले तैयार कर सकते हैं और सिस्टम की प्रतिक्रिया के अनुसार अपनी रणनीति बदल सकते हैं।

कैसे हो रही है वित्तीय संस्थानों को निशाना बनाने की कोशिश?

CERT-In की रिपोर्ट के अनुसार, साइबर अपराधी वित्तीय संस्थानों के इंटरनेट से जुड़े सर्वर, क्लाउड सिस्टम और पेमेंट API में मौजूद कमजोरियों का फायदा उठा रहे हैं।

हमले के दौरान कुछ प्रमुख तरीके सामने आए हैं:

1. पेमेंट API का दुरुपयोग

वित्तीय संस्थानों के डिजिटल पेमेंट सिस्टम में इस्तेमाल होने वाले API को निशाना बनाया जा रहा है। इनके जरिए बिना उचित अनुमति के फंड ट्रांसफर करने की कोशिश की जा रही है।

2. डिजिटल सिस्टम में सेंध

हमलावर इंटरनेट से जुड़े कमजोर सर्वर और सॉफ्टवेयर का फायदा उठाकर संस्थानों के सिस्टम तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।

3. क्लाउड सिस्टम को निशाना बनाना

कंपनियों के क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और मैनेजमेंट सिस्टम में मौजूद कमजोरियों का भी फायदा उठाया जा रहा है।

4. चोरी किए गए क्रेडेंशियल का इस्तेमाल

डिजिटल सिस्टम में इस्तेमाल होने वाले लॉगिन क्रेडेंशियल और API एक्सेस का गलत इस्तेमाल करके वित्तीय गतिविधियों को प्रभावित किया जा सकता है।

5. रिकॉर्ड मिटाने की कोशिश

कुछ मामलों में साइबर अपराधियों द्वारा डिजिटल रिकॉर्ड मिटाकर अपनी गतिविधियों के सबूत छिपाने की कोशिश भी सामने आई है।

₹1 के छोटे ट्रांजैक्शन के बाद हो सकता है बड़ा फ्रॉड

इस साइबर खतरे का एक चिंताजनक पहलू छोटे ट्रांजैक्शन के जरिए पेमेंट सिस्टम की जांच करना भी है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, हमलावर कुछ मामलों में पहले ₹1 जैसे छोटे ट्रांजैक्शन करते हैं और उसके बाद बड़े ट्रांजैक्शन की कोशिश करते हैं।

इस तरह की गतिविधियों के जरिए पेमेंट सिस्टम में मौजूद कमजोरियों का पता लगाने और अनधिकृत फंड ट्रांसफर करने का प्रयास किया जा सकता है।

इसके अलावा, धोखाधड़ी से ट्रांसफर किए गए पैसे को अलग-अलग बैंक खातों में भेजकर IMPS और NEFT के माध्यम से तेजी से आगे ट्रांसफर या निकाला जा सकता है।

किन वित्तीय संस्थानों को किया गया अलर्ट?

CERT-In और संबंधित साइबर सुरक्षा एजेंसियों ने वित्तीय क्षेत्र से जुड़ी कई तरह की संस्थाओं को सतर्क रहने की सलाह दी है।

इनमें शामिल हैं:

  • सरकारी और निजी बैंक

  • नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां (NBFCs)

  • डिजिटल लेंडिंग कंपनियां

  • फिनटेक कंपनियां

  • पेमेंट एग्रीगेटर्स

  • पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स

  • क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज

  • डिजिटल वॉलेट ऑपरेटर्स

एजेंसी के अनुसार, पहले से सुरक्षा उपाय करने वाली कुछ कंपनियों को भी दोबारा निशाना बनाया गया है। इसलिए केवल एक बार सुरक्षा जांच करना पर्याप्त नहीं है।

छुट्टियों और वीकेंड पर भी हो रहे हैं साइबर हमले

CERT-In ने अपनी एडवाइजरी में एक और महत्वपूर्ण बात बताई है।

साइबर अपराधी कुछ हमलों को छुट्टियों, वीकेंड और ऐसे समय पर अंजाम दे रहे हैं, जब वित्तीय संस्थानों की साइबर सुरक्षा टीमों की निगरानी अपेक्षाकृत कम हो सकती है।

इसका उद्देश्य संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाने और उन पर कार्रवाई करने में देरी करना है।

एजेंसी ने वित्तीय संस्थानों को लगातार निगरानी रखने और सुरक्षा टीमों को सक्रिय रखने की सलाह दी है।

CERT-In ने वित्तीय संस्थानों को क्या सलाह दी?

बढ़ते साइबर खतरे को देखते हुए CERT-In ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों को अपने डिजिटल सुरक्षा सिस्टम को मजबूत करने की सलाह दी है।

प्रमुख सुझाव इस प्रकार हैं:

  1. सभी पेमेंट सिस्टम की लगातार निगरानी की जाए।

  2. संदिग्ध ट्रांजैक्शन की तुरंत जांच की जाए।

  3. पेमेंट API की सुरक्षा मजबूत की जाए।

  4. पुराने और अनावश्यक डिजिटल इंटरफेस बंद किए जाएं।

  5. क्लाउड सिस्टम की नियमित सुरक्षा जांच की जाए।

  6. कर्मचारियों और सिस्टम के एक्सेस पर नियंत्रण रखा जाए।

  7. संदिग्ध गतिविधि मिलने पर प्रभावित सिस्टम को सुरक्षित किया जाए।

  8. साइबर हमले की जानकारी संबंधित सरकारी एजेंसियों को दी जाए।

इसके अलावा, I4C ने वित्तीय संस्थानों को ट्रांजैक्शन लिमिट, लाभार्थी के नाम का सत्यापन और असामान्य भुगतान गतिविधियों की निगरानी मजबूत करने की सलाह दी है।

साइबर हमले की जानकारी कितने समय में देनी होगी?

साइबर सुरक्षा एजेंसियों ने वित्तीय संस्थानों को साइबर घटनाओं की रिपोर्टिंग को लेकर भी निर्देश दिए हैं।

CERT-In के निर्धारित नियमों के अनुसार, संबंधित साइबर सुरक्षा घटनाओं की जानकारी घटना का पता चलने के छह घंटे के भीतर CERT-In को देनी होती है।

बैंकों और NBFCs को RBI के DAKSH पोर्टल के माध्यम से भी निर्धारित समयसीमा में रिपोर्टिंग करनी होती है।

इससे साइबर हमलों की जांच और संभावित वित्तीय नुकसान को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

आम बैंक ग्राहकों पर क्या पड़ सकता है असर?

फिलहाल CERT-In की यह चेतावनी मुख्य रूप से बैंकों और वित्तीय संस्थानों के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर है।

हालांकि, ऐसे साइबर हमलों का असर अप्रत्यक्ष रूप से आम बैंक ग्राहकों पर भी पड़ सकता है।

यदि किसी वित्तीय संस्थान का पेमेंट सिस्टम प्रभावित होता है, तो अनधिकृत ट्रांजैक्शन, डिजिटल भुगतान सेवाओं में बाधा और वित्तीय डेटा की सुरक्षा से जुड़े जोखिम पैदा हो सकते हैं।

इसलिए आम ग्राहकों को भी डिजिटल बैंकिंग का इस्तेमाल करते समय सावधानी बरतनी चाहिए।

ग्राहकों के लिए जरूरी सावधानियां:

  • अपना OTP और UPI PIN किसी के साथ साझा न करें।

  • अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें।

  • बैंकिंग से जुड़े पासवर्ड किसी के साथ साझा न करें।

  • किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर मोबाइल में रिमोट एक्सेस ऐप इंस्टॉल न करें।

  • बैंक खाते में संदिग्ध ट्रांजैक्शन दिखाई देने पर तुरंत बैंक को सूचित करें।

  • किसी वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत करें।

भारत में क्यों बढ़ रही है AI साइबर सुरक्षा की चुनौती?

भारत में डिजिटल बैंकिंग, UPI, ऑनलाइन पेमेंट और फिनटेक सेवाओं का तेजी से विस्तार हुआ है।

आज करोड़ों लोग मोबाइल और इंटरनेट के माध्यम से वित्तीय लेनदेन कर रहे हैं। ऐसे में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण हो गई है।

AI तकनीक जहां बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं को बेहतर बनाने में मदद कर रही है, वहीं इसका गलत इस्तेमाल साइबर अपराधियों के लिए नए अवसर भी पैदा कर रहा है।

अब साइबर अपराधी पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ ऑटोमेटेड AI सिस्टम का इस्तेमाल करके तेजी से हमले करने में सक्षम हो रहे हैं।

ऐसे में बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिए मजबूत साइबर सुरक्षा व्यवस्था तैयार करना पहले से अधिक जरूरी हो गया है।

निष्कर्ष

CERT-In का ताजा अलर्ट भारत के वित्तीय और बैंकिंग क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी है। AI आधारित साइबर हमलों की बढ़ती क्षमता ने डिजिटल पेमेंट सिस्टम और वित्तीय संस्थानों की सुरक्षा को नई चुनौती दी है।

सरकारी एजेंसियों ने बैंकों, NBFCs और फिनटेक कंपनियों को अपने डिजिटल सिस्टम की सुरक्षा मजबूत करने और संदिग्ध गतिविधियों पर लगातार नजर रखने की सलाह दी है।

आने वाले समय में AI तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर सुरक्षा को मजबूत करना भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए बेहद जरूरी होगा।