नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश को नशे की समस्या से मुक्त करने के लिए पुलिस बलों से एकजुट होकर काम करने की अपील की है। बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय पुलिस स्मारक में पुलिस स्मृति दिवस के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने 31 दिसंबर 2029 तक देश से नशे की समस्या को समाप्त करने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने पुलिस और संबंधित एजेंसियों से इस दिशा में पूरी गंभीरता के साथ काम करने का आह्वान किया।
गृह मंत्री के इस बयान के बाद नशे के खिलाफ देशव्यापी अभियान को लेकर चर्चा तेज हो गई है। सरकार की प्राथमिकता केवल नशीले पदार्थों की तस्करी रोकना ही नहीं, बल्कि युवाओं को इसके दुष्प्रभावों से बचाना और नशे के अवैध कारोबार से जुड़े नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई करना भी है।
पुलिस स्मृति दिवस पर अमित शाह ने क्या कहा?
पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर अमित शाह ने ड्यूटी के दौरान अपने प्राण गंवाने वाले पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उन्होंने देश की आंतरिक सुरक्षा में पुलिस बलों के योगदान को महत्वपूर्ण बताया।
अपने संबोधन में उन्होंने नशे की समस्या को गंभीर चुनौती बताते हुए कहा कि इसका असर देश की आने वाली पीढ़ियों पर पड़ता है। उनके अनुसार, नशीले पदार्थों का अवैध कारोबार अर्थव्यवस्था पर भी बोझ डालता है और इससे प्राप्त धन का इस्तेमाल देशविरोधी गतिविधियों में किया जा सकता है।
अमित शाह ने पुलिस बलों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में तैयार नशामुक्त भारत की कार्ययोजना को जमीन पर उतारने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करने का आग्रह किया।
31 दिसंबर 2029 तक नशामुक्त भारत बनाने की योजना
सरकार ने नशीले पदार्थों के खिलाफ अभियान के लिए वर्ष 2029 के अंत तक का लक्ष्य निर्धारित किया है। गृह मंत्री के मुताबिक, वर्ष 2026 के शेष महीनों के साथ 2027, 2028 और 2029 में इस दिशा में सामूहिक प्रयास किए जाएंगे।
इस अभियान में केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, पुलिस, नशा नियंत्रण एजेंसियों और अन्य संबंधित विभागों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत होगी। नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े नेटवर्क पर कार्रवाई के साथ-साथ नशे की मांग कम करने और लोगों को जागरूक करने जैसे प्रयास भी महत्वपूर्ण होंगे।
हालांकि, तय समयसीमा एक सरकारी लक्ष्य है। इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि विभिन्न एजेंसियां योजनाओं को कितनी प्रभावी तरीके से लागू करती हैं और नशे की समस्या से निपटने के लिए लगातार किस तरह के कदम उठाती हैं।
नशे की समस्या को गंभीर चुनौती क्यों मान रही है सरकार?
नशीले पदार्थों का अवैध कारोबार कानून-व्यवस्था के साथ-साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य और सामाजिक विकास से भी जुड़ा मुद्दा है। इसका असर युवाओं, परिवारों और समुदायों पर पड़ सकता है।
नशे की लत से प्रभावित लोगों को स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और पारिवारिक जीवन में परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। वहीं, तस्करी से जुड़े संगठित नेटवर्क अपराध और अवैध आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दे सकते हैं।
इसी वजह से नशे के खिलाफ अभियान में केवल कानून लागू करने वाली एजेंसियों की कार्रवाई पर्याप्त नहीं मानी जाती। जागरूकता, समय पर सहायता, उपचार की उपलब्धता और परिवारों व समुदायों की भागीदारी भी अहम भूमिका निभाती है।
देशभर में चलाया जाएगा नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान
पुलिस स्मृति दिवस के कार्यक्रम में अमित शाह ने ‘फाइट अगेंस्ट ड्रग्स’ संदेश के साथ एक राष्ट्रव्यापी मोटरसाइकिल रैली को भी रवाना किया। इस रैली में विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के साथ केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों तथा अन्य केंद्रीय संगठनों के प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
इस पहल का उद्देश्य नशे के खिलाफ जागरूकता का संदेश लोगों तक पहुंचाना है। ऐसे अभियान युवाओं और आम नागरिकों को नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने तथा समाज की भागीदारी बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।
आगे क्या होगा?
31 दिसंबर 2029 की समयसीमा को ध्यान में रखते हुए आने वाले वर्षों में नशीले पदार्थों की तस्करी पर नियंत्रण, संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय और जनजागरूकता पर जोर रहने की उम्मीद है।
इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सहयोग महत्वपूर्ण होगा। साथ ही, नशे से प्रभावित लोगों को सहायता और उपचार उपलब्ध कराना भी जरूरी रहेगा, ताकि समस्या का समाधान केवल कार्रवाई तक सीमित न रहे।
निष्कर्ष: अमित शाह ने पुलिस बलों से नशे के खिलाफ अभियान को प्राथमिकता देने की अपील करते हुए 31 दिसंबर 2029 तक नशामुक्त भारत बनाने के लक्ष्य को दोहराया है। अब इस दिशा में सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन, राज्यों के बीच समन्वय और समाज की भागीदारी अहम होगी।

