नई दिल्ली, 25 अक्टूबर 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 139वें एपिसोड के जरिए देशवासियों को संबोधित किया। इस कार्यक्रम में उन्होंने इसकी 12 वर्षों की यात्रा को याद किया और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने वाले लोगों के प्रयासों की सराहना की। प्रधानमंत्री ने त्योहारों के दौरान स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देने, पारंपरिक हुनर को बढ़ावा देने, पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीक के इस्तेमाल जैसे विषयों पर भी चर्चा की।
इस बार के कार्यक्रम में बिहार के मखाने का ग्रीस तक पहुंचना विशेष रूप से चर्चा में रहा। प्रधानमंत्री ने इसे स्थानीय उत्पादों के लिए नए अंतरराष्ट्रीय बाजार खुलने के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया।
मन की बात के 139वें एपिसोड में क्या बोले पीएम मोदी?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ‘मन की बात’ उनके लिए देश के आम लोगों की मेहनत, साहस, समर्पण और सेवा भावना को सामने लाने का अवसर रहा है। उन्होंने कार्यक्रम की तुलना तीर्थयात्रा से करते हुए कहा कि इसके माध्यम से देश के अलग-अलग हिस्सों में काम कर रहे ऐसे लोगों की प्रेरक कहानियां सामने आई हैं, जिनके योगदान पर अक्सर पर्याप्त ध्यान नहीं जाता।
उन्होंने श्रोताओं को इस यात्रा का सहयात्री और मार्गदर्शक बताया। कार्यक्रम का मुख्य संदेश समाज में हो रहे अच्छे कार्यों को पहचान देना और नागरिकों की भागीदारी को प्रोत्साहित करना रहा।
1. बिहार के मखाने का ग्रीस तक पहुंचना
इस एपिसोड में बिहार के लिए खास बात मखाने का उल्लेख रहा। प्रधानमंत्री ने बताया कि बिहार का मखाना अब ग्रीस तक पहुंच रहा है। उन्होंने स्थानीय उत्पादों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार खुलने को भारतीय किसानों और उत्पादकों के लिए एक सकारात्मक अवसर के रूप में पेश किया।
मखाना बिहार की महत्वपूर्ण कृषि एवं खाद्य उपज में शामिल है। इसके निर्यात और दूसरे देशों में बाजार विस्तार से उत्पादकों, प्रसंस्करण इकाइयों, पैकेजिंग कारोबार और व्यापारियों के लिए अवसर पैदा हो सकते हैं।
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थायी सफलता के लिए गुणवत्ता, खाद्य सुरक्षा मानकों, आकर्षक पैकेजिंग, आपूर्ति व्यवस्था और ब्रांडिंग पर ध्यान देना जरूरी है। केवल निर्यात की खबर से किसानों की आय में हुई वास्तविक वृद्धि का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
2. त्योहारों पर स्थानीय उत्पाद खरीदने की अपील
प्रधानमंत्री ने दिवाली और छठ जैसे त्योहारों के दौरान स्थानीय कारीगरों और उत्पादकों के बनाए सामान को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पाद खरीदने से कारीगरों का उत्साह बढ़ता है और ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को मजबूती मिलती है।
इस संदेश का उद्देश्य उपभोक्ताओं को खरीदारी के दौरान देश में बने सामान, पारंपरिक हस्तशिल्प और स्थानीय कारोबारों पर भी ध्यान देने के लिए प्रेरित करना है।
विश्लेषण के लिहाज से यह संदेश छोटे कारोबारों के लिए महत्वपूर्ण है। स्थानीय उत्पादों की गुणवत्ता, उचित मूल्य और बेहतर प्रस्तुति के साथ डिजिटल मार्केटिंग तथा ऑनलाइन बिक्री उन्हें व्यापक ग्राहक वर्ग तक पहुंचने में मदद कर सकती है।
3. प्राकृतिक खेती और पंजाब के नव-त्रिन्जन की पहल
प्रधानमंत्री ने पंजाब के मालवा क्षेत्र में प्राकृतिक कपास की खेती को बढ़ावा देने वाली ‘खेती विरासत मिशन’ संस्था की पहल ‘नव-त्रिन्जन’ का उल्लेख किया।
इस पहल के तहत बिना रासायनिक पदार्थों के जैविक कपास उगाने और प्राकृतिक रंगों वाली कपास को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। इसका उद्देश्य पारंपरिक कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करना और कपड़ा निर्माण में रासायनिक रंगों पर निर्भरता कम करना है।
प्रधानमंत्री ने इस पहल से जुड़े बुनाई विद्यालय का भी जिक्र किया, जो महिलाओं को बुनकरी का कौशल सिखाता है। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के बाद कई महिलाएं हथकरघे पर कपड़े, शॉल और तौलिये जैसे उत्पाद बना रही हैं।
यह उदाहरण दिखाता है कि कृषि, पारंपरिक कौशल और महिला रोजगार को एक साथ जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की संभावनाएं विकसित की जा सकती हैं।
4. उत्तराखंड में हेवल नदी को पुनर्जीवित करने का प्रयास
कार्यक्रम में उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल क्षेत्र की हेवल नदी के संरक्षण का उदाहरण भी सामने आया। प्रधानमंत्री के अनुसार, नदी का जलस्तर घटने और आसपास के प्राकृतिक जलस्रोत सूखने की समस्या के बाद स्थानीय प्रशासन तथा ग्रामीणों ने मिलकर अभियान शुरू किया।
इस अभियान में वर्षा जल संरक्षण, भूजल पुनर्भरण और पौधारोपण जैसे उपाय किए गए। प्रधानमंत्री ने बताया कि इन प्रयासों से नदी को पुनर्जीवित करने में मदद मिली और आसपास के कई प्राकृतिक जलस्रोतों के पुनर्स्थापन में भी सहायता हुई।
यह उदाहरण जल संरक्षण के लिए स्थानीय भागीदारी की अहमियत को सामने लाता है। हालांकि, नदी और जलस्रोतों की दीर्घकालिक स्थिति का आकलन करने के लिए नियमित जलस्तर, जलगुणवत्ता और भूजल संबंधी आंकड़ों की निगरानी आवश्यक होती है।
5. खादी की बिक्री में बढ़ोतरी का जिक्र
प्रधानमंत्री ने खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों की बढ़ती लोकप्रियता का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस वर्ष गांधी जयंती पर खादी ग्रामोद्योग उत्पादों की बिक्री एक दिन में ₹28 करोड़ से अधिक रही, जो पिछले वर्ष की तुलना में ₹1.5 करोड़ अधिक है।
यह आंकड़ा पारंपरिक उत्पादों के प्रति उपभोक्ताओं की रुचि का संकेत देता है। खादी और हस्तनिर्मित उत्पादों के कारोबार में बिक्री बढ़ने से कारीगरों और संबंधित उद्यमों को लाभ मिलने की संभावना रहती है।
हालांकि, केवल एक दिन की बिक्री के आंकड़े के आधार पर पूरे वर्ष की मांग, कारोबार के मुनाफे या सभी कारीगरों की आय में वृद्धि का आकलन नहीं किया जा सकता।
6. स्थानीय उत्पादों की पैकेजिंग पर जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी उत्पाद की गुणवत्ता के साथ उसकी पैकेजिंग भी महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने महाराष्ट्र के आदिवासी समुदायों से जुड़े ‘शबरी नेचुरल्स’ का उदाहरण दिया, जिसके उत्पादों की पैकेजिंग में जनजातीय कला को स्थान दिया गया है।
उन्होंने बताया कि इस पैकेजिंग को जापान का प्रतिष्ठित ‘गुड डिजाइन अवॉर्ड’ मिला है। इसके साथ ही कर्नाटक में बांस और कृषि अवशेषों से पैकेजिंग सामग्री बनाने के प्रयासों का भी जिक्र किया।
इस चर्चा से छोटे और मध्यम कारोबारों के लिए महत्वपूर्ण सीख मिलती है। आकर्षक पैकेजिंग उत्पाद की पहचान बनाने, ग्राहकों का भरोसा बढ़ाने और बाजार में अलग पहचान बनाने में मदद कर सकती है। खाद्य उत्पादों के मामले में पैकेजिंग को स्वच्छता, सुरक्षा और लागू नियमों के अनुरूप होना भी जरूरी है।
7. ई-संजीवनी से करीब 50 करोड़ टेली-कंसल्टेशन
प्रधानमंत्री ने डिजिटल स्वास्थ्य सेवा ‘ई-संजीवनी’ की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके जरिए अब तक करीब 50 करोड़ टेली-कंसल्टेशन किए जा चुके हैं।
उन्होंने अंडमान-निकोबार के बाराटांग द्वीप का उदाहरण दिया, जहां एक बच्चे को तेज बुखार और सांस लेने में परेशानी होने पर स्थानीय स्वास्थ्यकर्मी ने ई-संजीवनी के माध्यम से विशेषज्ञ चिकित्सक से संपर्क किया। प्रधानमंत्री के अनुसार, बच्चे को निमोनिया था और डॉक्टर की निगरानी में आने के बाद उसकी स्थिति में सुधार हुआ।
इस उदाहरण के जरिए दूरदराज के इलाकों में डिजिटल माध्यम से चिकित्सा परामर्श उपलब्ध कराने की उपयोगिता पर जोर दिया गया। टेली-कंसल्टेशन से विशेषज्ञों तक पहुंच आसान हो सकती है, हालांकि आपातकालीन परिस्थितियों में प्रत्यक्ष चिकित्सा और जरूरी जांच की आवश्यकता बनी रहती है।
8. आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की भूमिका
प्रधानमंत्री ने देशभर में लगभग 1.90 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ये केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को लोगों के करीब लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
उन्होंने नियमित स्वास्थ्य जांच और ई-संजीवनी जैसी सेवाओं के योगदान पर भी जोर दिया। प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, समय पर जांच और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों से परामर्श लोगों के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
हालांकि, इन केंद्रों की वास्तविक प्रभावशीलता का आकलन करने के लिए स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता, जांच सुविधाओं, दवाओं, मरीजों की संख्या और उपचार के परिणामों जैसे संकेतकों को भी देखना आवश्यक है।
9. IIT मद्रास में मानव मस्तिष्क पर शोध
कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने चेन्नई स्थित IIT मद्रास के सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि केंद्र मानव मस्तिष्क की हाई-रिजॉल्यूशन डिजिटल 3D तस्वीरें तैयार करने वाली तकनीक पर काम कर रहा है।
इस परियोजना का लक्ष्य 100 मानव मस्तिष्कों की 3D मैपिंग करना और उनका विस्तृत अध्ययन करना है। प्रधानमंत्री ने बताया कि इस कार्य में परम शक्ति सुपरकंप्यूटर का उपयोग किया जा रहा है और शोध से जुड़े डेटा को भविष्य में अलग-अलग क्षेत्रों के अनुसंधान के लिए उपलब्ध कराने की योजना है।
मानव मस्तिष्क की संरचना को बेहतर समझने से वैज्ञानिक अनुसंधान को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इस तरह के शोध से किसी बीमारी का उपचार विकसित होने में समय लग सकता है और इसके लिए आगे वैज्ञानिक परीक्षण जरूरी होते हैं।
10. पारंपरिक कौशल और जनभागीदारी का संदेश
‘मन की बात’ के 139वें एपिसोड में प्राकृतिक खेती, हथकरघा, स्थानीय उत्पाद, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य सेवाओं और विज्ञान जैसे विभिन्न विषयों को जोड़ा गया।
इन उदाहरणों में एक साझा विचार दिखाई देता है—स्थानीय स्तर पर किए गए प्रयास व्यापक सामाजिक और आर्थिक बदलावों में योगदान दे सकते हैं। किसान, कारीगर, महिलाएं, स्वास्थ्यकर्मी, वैज्ञानिक और स्थानीय समुदाय अपने-अपने क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
प्रधानमंत्री ने लोगों से त्योहारों के दौरान स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देने की अपील करते हुए ‘वोकल फॉर लोकल’ और आत्मनिर्भर भारत के संदेश को दोहराया।
मन की बात 139वें एपिसोड का विश्लेषण
इस एपिसोड की प्रमुख बातों का विश्लेषण करने पर तीन महत्वपूर्ण पहलू सामने आते हैं।
पहला, स्थानीय अर्थव्यवस्था: बिहार के मखाने और खादी की बिक्री का उल्लेख स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय पहचान और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की संभावना को रेखांकित करता है।
दूसरा, पर्यावरण और पारंपरिक कौशल: प्राकृतिक कपास की खेती, हथकरघा और नदी संरक्षण के उदाहरण ग्रामीण आजीविका तथा पर्यावरण के बीच संबंध को सामने लाते हैं।
तीसरा, तकनीक और जनसेवा: ई-संजीवनी और मानव मस्तिष्क पर शोध के उदाहरण बताते हैं कि तकनीक का उपयोग स्वास्थ्य सेवाओं और वैज्ञानिक अनुसंधान में किया जा रहा है।
इन पहलों के दीर्घकालिक प्रभाव को समझने के लिए केवल घोषणाओं या उदाहरणों के बजाय परिणामों के आंकड़ों को भी देखना जरूरी है। किसानों की आय, स्थानीय उत्पादों के निर्यात, रोजगार, जल संरक्षण और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता जैसे संकेतक भविष्य में इनके प्रभाव का बेहतर आकलन करने में मदद करेंगे।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘मन की बात’ का 139वां एपिसोड स्थानीय उत्पादों, पारंपरिक कौशल, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य सेवाओं और वैज्ञानिक अनुसंधान पर केंद्रित रहा। बिहार के मखाने का ग्रीस तक पहुंचना इस कार्यक्रम के प्रमुख उल्लेखों में शामिल रहा।
कार्यक्रम के जरिए प्रधानमंत्री ने लोगों से स्थानीय कारीगरों और उत्पादकों को समर्थन देने तथा समाज में सकारात्मक बदलाव लाने वाले प्रयासों को पहचानने की अपील की। इन पहलों की वास्तविक सफलता का आकलन समय के साथ सामने आने वाले आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय परिणामों से किया जा सकेगा।
स्रोत: प्रधानमंत्री कार्यालय (PM India), प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB), 25 अक्टूबर 2026।




